डीड ऑफ अपार्टमेंट वह रजिस्टर्ड दस्तावेज़ है जो रजिस्टर्ड डिक्लेरेशन द्वारा महाराष्ट्र अपार्टमेंट ओनरशिप एक्ट, 1970 के तहत सबमिट इमारत में फ्लैट और ज़मीन व कॉमन एरिया में उसका प्रतिशत अविभाजित हिस्सा खरीदार को कन्वे करता है। डेवलपर या ज़मीन मालिक इसे अपार्टमेंट मालिक के पक्ष में निष्पादित करता है। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट फॉर सेल पर पूरी स्टाम्प ड्यूटी दी हो तो वह समायोजित होती है, इसलिए शेष रकम अक्सर नाममात्र होती है।
कॉन्डोमिनियम रूट कैसे काम करता है
- डेवलपर या ज़मीन मालिक ज़मीन और इमारत को अपार्टमेंट ओनरशिप एक्ट के तहत सबमिट करने वाला डिक्लेरेशन निष्पादित और रजिस्टर करता है।
- हर खरीदार एग्रीमेंट टू अपार्टमेंट या एग्रीमेंट फॉर सेल करता है।
- पूरा होने पर हर खरीदार के पक्ष में फ्लैट और कॉमन एरिया का हिस्सा कन्वे करने वाली डीड ऑफ अपार्टमेंट होती है।
- कोऑपरेटिव सोसायटी की जगह इमारत चलाने के लिए अपार्टमेंट मालिक एसोसिएशन बनाते हैं।
टाइटल सीधे हर मालिक को मिलता है, इसलिए इस रूट में अलग सोसायटी कन्वेयंस की ज़रूरत नहीं होती।
डीड ऑफ अपार्टमेंट के लिए ज़रूरी दस्तावेज़
अपार्टमेंट मालिक
- रजिस्टर्ड एग्रीमेंट फॉर सेल / अपार्टमेंट एग्रीमेंट और इंडेक्स-II
- एग्रीमेंट की स्टाम्प ड्यूटी रसीद
- आधार और पैन कार्ड
- पज़ेशन लेटर
डेवलपर / मालिक
- MAOA के तहत रजिस्टर्ड डिक्लेरेशन और इंडेक्स-II
- टाइटल दस्तावेज़ और स्वीकृत नक्शे
- ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट
- हस्ताक्षरकर्ता का अधिकार
गवाह
- दो गवाहों का आधार
डीड ऑफ अपार्टमेंट की प्रक्रिया कैसे होती है
- डिक्लेरेशन जाँचें
पुष्टि करते हैं कि इमारत MAOA के तहत सबमिट है और आपके फ्लैट का प्रतिशत हिस्सा दर्ज है।
- डीड ड्राफ्ट
डिक्लेरेशन के अनुसार विवरण, हिस्सा, कॉमन एरिया और प्रतिबंधों के साथ ड्राफ्ट।
- स्टाम्प ड्यूटी समायोजन
बाज़ार मूल्य पर ड्यूटी और आपके एग्रीमेंट पर दी गई ड्यूटी का समायोजन निकालते हैं।
- रजिस्टर
डेवलपर और अपार्टमेंट मालिक दो गवाहों के साथ सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में हस्ताक्षर करते हैं।
- रिकॉर्ड
प्रॉपर्टी टैक्स और एसोसिएशन रिकॉर्ड आपके नाम कराने में मदद।
अपना डीड ऑफ अपार्टमेंट बिना उलझन के पूरा करें
अपनी जानकारी WhatsApp पर भेजें। भुगतान से पहले ही हम दस्तावेज़ों की सटीक सूची और स्टाम्प ड्यूटी का अनुमान देते हैं।
जब डीड ऑफ अपार्टमेंट में देरी हो
पुराने कॉन्डोमिनियम प्रोजेक्ट के कई खरीदारों को कभी डीड ऑफ अपार्टमेंट नहीं मिली, जिससे रीसेल या रीडेवलपमेंट में दिक्कत आती है। मालिक मिलकर डेवलपर से डीड निष्पादित करने को कह सकते हैं; डेवलपर सहयोग न करे तो कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। हम आपके दस्तावेज़ देखकर व्यावहारिक रास्ता सुझाते हैं।
पुणे, पिंपरी-चिंचवड, मुंबई, ठाणे और पालघर में डीड ऑफ अपार्टमेंट
इन सभी शहरों के ग्राहकों के लिए हम डीड ऑफ अपार्टमेंट का काम करते हैं। स्थानीय स्तर पर क्या अलग है:
| शहर | स्थानीय जानकारी |
|---|---|
| पुणे | स्टाम्प ड्यूटी PMC सीमा में ~7% (महिलाओं के लिए 6%), मेट्रो सेस और LBT सहित। रजिस्ट्रेशन: हवेली और पुणे शहर के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस। |
| पिंपरी-चिंचवड | स्टाम्प ड्यूटी PCMC सीमा में ~7% (महिलाओं के लिए 6%), मेट्रो सेस और LBT सहित। रजिस्ट्रेशन: पिंपरी-चिंचवड का संबंधित सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (हवेली / मावल / मुलशी)। |
| मुंबई | स्टाम्प ड्यूटी BMC सीमा में 1% मेट्रो सेस सहित 6% (महिलाओं के लिए 5%)। रजिस्ट्रेशन: मुंबई सिटी और मुंबई सबअर्बन सब-रजिस्ट्रार ऑफिस। |
| ठाणे | स्टाम्प ड्यूटी TMC सीमा में ~7% (महिलाओं के लिए 6%), मेट्रो सेस और LBT सहित। रजिस्ट्रेशन: ठाणे ज़िला सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (ठाणे, कल्याण, भिवंडी, उल्हासनगर, अंबरनाथ)। |
| पालघर | स्टाम्प ड्यूटी नगर निगम, परिषद या ग्राम पंचायत सीमा के अनुसार ~4–7%। रजिस्ट्रेशन: पालघर ज़िला सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (वसई, पालघर, डहाणू और अन्य)। |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
डीड ऑफ अपार्टमेंट क्या है?
महाराष्ट्र अपार्टमेंट ओनरशिप एक्ट, 1970 के तहत सबमिट इमारत में फ्लैट को, ज़मीन और कॉमन एरिया के हिस्से सहित, खरीदार को रजिस्टर्ड कन्वेयंस।
क्या डीड ऑफ अपार्टमेंट पर दोबारा स्टाम्प ड्यूटी लगती है?
रजिस्टर्ड एग्रीमेंट फॉर सेल पर पूरी ड्यूटी दी हो तो वह समायोजित होती है, इसलिए शेष अक्सर नाममात्र होता है। एग्रीमेंट पर कम स्टाम्प हुआ हो तो अंतर देना होता है।
डीड ऑफ अपार्टमेंट कौन निष्पादित करता है?
डिक्लेरेशन करने वाला डेवलपर या ज़मीन मालिक, हर अपार्टमेंट मालिक के पक्ष में। दोनों सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में हस्ताक्षर करते हैं।
अगर मेरी इमारत का डिक्लेरेशन नहीं है तो?
तब वह MAOA के तहत नहीं है, और ज़मीन का टाइटल आमतौर पर कन्वेयंस या डीम्ड कन्वेयंस से कोऑपरेटिव सोसायटी को जाता है।
क्या फ्लैट बेचने के लिए डीड ऑफ अपार्टमेंट ज़रूरी है?
इसकी पुरज़ोर सलाह है। खरीदार और बैंक पूरी टाइटल चेन चाहते हैं; इसके बिना रीसेल और लोन में देरी हो सकती है।






