एग्रीमेंट टू सेल में कीमत, भुगतान के चरण और वे शर्तें होती हैं जिन पर विक्रेता संपत्ति ख़रीदार को हस्तांतरित करेगा। महाराष्ट्र में अगर कब्ज़ा दिया गया हो या देने का तय हो, तो एग्रीमेंट को कन्वेयंस माना जाता है और उस पर पूरी स्टाम्प ड्यूटी लगती है (मुंबई में 6%, पुणे-ठाणे में लगभग 7%); हस्ताक्षर के चार महीने के भीतर सब-रजिस्ट्रार के पास रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है।
एग्रीमेंट टू सेल क्या है?
एग्रीमेंट टू सेल (एग्रीमेंट फ़ॉर सेल या बिक्री अनुबंध) एक अनुबंध है जिसमें विक्रेता भविष्य की शर्तों पर — आम तौर पर पूरा भुगतान, लोन वितरण या बिल्डर का निर्माण पूरा होना — संपत्ति ख़रीदार को हस्तांतरित करने का वादा करता है। स्वामित्व बाद में सेल डीड या कन्वेयंस से हस्तांतरित होता है।
संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 54 के अनुसार एग्रीमेंट टू सेल अपने आप में स्वामित्व नहीं बनाता। लेकिन महाराष्ट्र में स्टाम्प अधिनियम कब्ज़ा दिए गए या देने के लिए तय एग्रीमेंट को कन्वेयंस मानता है। इसीलिए पुणे-मुंबई में ज़्यादातर फ़्लैट ख़रीद एग्रीमेंट पर एग्रीमेंट के चरण में ही पूरी स्टाम्प ड्यूटी भरी जाती है।
एग्रीमेंट टू सेल के लिए ज़रूरी दस्तावेज़
विक्रेता
- आधार और पैन कार्ड
- टाइटल डीड / पिछली सेल डीड और इंडेक्स-II
- हाल की प्रॉपर्टी टैक्स रसीद और बिजली बिल
- सोसाइटी NOC और शेयर सर्टिफ़िकेट (फ़्लैट के लिए)
- 7/12 उतारा या प्रॉपर्टी कार्ड (ज़मीन के लिए)
ख़रीदार
- आधार और पैन कार्ड
- पासपोर्ट साइज़ फ़ोटो
- होम लोन हो तो बैंक का सैंक्शन लेटर
- भुगतान विवरण: चेक / RTGS संदर्भ
गवाह और अन्य
- दो गवाहों का आधार
- किसी पक्ष की ओर से कोई और हस्ताक्षर करे तो पावर ऑफ अटॉर्नी
- बिल्डर के कागज़ात: RERA नंबर, कमेंसमेंट सर्टिफ़िकेट (नए फ़्लैट)
एग्रीमेंट टू सेल की प्रक्रिया कैसे होती है
- टाइटल जाँच
विक्रेता की स्वामित्व श्रृंखला, इंडेक्स-II, सोसाइटी रिकॉर्ड और भार (एन्कम्ब्रेंस) जाँचते हैं ताकि विवादित संपत्ति पर एडवांस न जाए।
- एग्रीमेंट का ड्राफ्ट
कीमत, बयाना राशि, भुगतान चरण, कब्ज़े की तारीख, लोन की शर्त, डिफ़ॉल्ट और रिफ़ंड की शर्तें बनाकर मंज़ूरी के लिए भेजते हैं।
- स्टाम्प ड्यूटी गणना
एग्रीमेंट मूल्य और रेडी रेकनर मूल्य में से जो ज़्यादा हो उस पर ड्यूटी निकालकर GRAS ई-चालान बनाते हैं।
- सब-रजिस्ट्रार अपॉइंटमेंट
सब-रजिस्ट्रार का समय (या बिल्डर दे तो ई-रजिस्ट्रेशन) बुक करके दस्तावेज़ हस्ताक्षर के लिए तैयार रखते हैं।
- रजिस्ट्रेशन
पक्षकार हस्ताक्षर करते हैं, फ़ोटो और अंगूठे के निशान लिए जाते हैं, और इंडेक्स-II के साथ रजिस्टर्ड एग्रीमेंट आपको मिलता है।
अपना एग्रीमेंट टू सेल बिना उलझन के पूरा करें
अपनी जानकारी WhatsApp पर भेजें। भुगतान से पहले ही हम दस्तावेज़ों की सटीक सूची और स्टाम्प ड्यूटी का अनुमान देते हैं।
एग्रीमेंट टू सेल कब चाहिए?
- नया फ़्लैट बुक करते समय — RERA धारा 13 के अनुसार रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के बिना बिल्डर फ़्लैट की कीमत का 10% से अधिक नहीं ले सकता।
- होम लोन से रीसेल फ़्लैट ख़रीदते समय — बैंक रजिस्टर्ड एग्रीमेंट और इंडेक्स-II पर लोन मंज़ूर करते हैं।
- ज़मीन या प्लॉट ख़रीदते समय — जब भुगतान महीनों में हो या NA/नाप-जोख बाकी हो।
- कीमत तय करने के लिए — जब विक्रेता सोसाइटी NOC या पुराना लोन चुका रहा हो।
एग्रीमेंट टू सेल पर स्टाम्प ड्यूटी
स्टाम्प ड्यूटी एग्रीमेंट मूल्य और सरकारी रेडी रेकनर मूल्य में से जो अधिक हो उस पर लगती है। मुंबई नगर निगम क्षेत्र में 6% (1% मेट्रो सेस सहित), और पुणे, पिंपरी-चिंचवड व ठाणे नगर निगम क्षेत्र में मेट्रो सेस और LBT सहित लगभग 7%। आवासीय संपत्ति पर महिला ख़रीदारों को शर्तों के साथ 1% छूट मिलती है।
रजिस्ट्रेशन शुल्क मूल्य का 1%, अधिकतम ₹30,000। एग्रीमेंट में कब्ज़ा न दिया जाए तो स्टाम्प अधिनियम का अलग अनुच्छेद लागू होता है और ड्यूटी कम होती है — भुगतान से पहले आपके सौदे पर कौन-सा लागू है, हम तय करते हैं।
सुझाव: रजिस्टर्ड एग्रीमेंट बाद में रद्द हो तो समय-सीमा में आवेदन करने पर स्टाम्प ड्यूटी का कुछ हिस्सा वापस मिल सकता है। देखें: कैंसलेशन डीड।
ख़रीदारों की आम गलतियाँ जिनसे हम बचाते हैं
- रिफ़ंड शर्त के बिना अनरजिस्टर्ड “MOU” पर बड़ी टोकन राशि देना।
- एग्रीमेंट का मूल्य कम दिखाना — सब-रजिस्ट्रार रेडी रेकनर पर ही ड्यूटी लेते हैं, और कम मूल्यांकन पर धारा 32A के तहत नोटिस आ सकता है।
- सोसाइटी NOC, बकाया या फ़्लैट पर बैंक का चार्ज जाँचना भूल जाना।
- भुगतान चरणों को लोन वितरण से न जोड़ना, जिससे बैंक की देरी पर ख़रीदार डिफ़ॉल्टर बन जाता है।
पुणे, पिंपरी-चिंचवड, मुंबई, ठाणे और पालघर में एग्रीमेंट टू सेल (बिक्री अनुबंध)
इन सभी शहरों के ग्राहकों के लिए हम एग्रीमेंट टू सेल का काम करते हैं। स्थानीय स्तर पर क्या अलग है:
| शहर | स्थानीय जानकारी |
|---|---|
| पुणे | स्टाम्प ड्यूटी PMC सीमा में ~7% (महिलाओं के लिए 6%), मेट्रो सेस और LBT सहित। रजिस्ट्रेशन: हवेली और पुणे शहर के सब-रजिस्ट्रार ऑफिस। |
| पिंपरी-चिंचवड | स्टाम्प ड्यूटी PCMC सीमा में ~7% (महिलाओं के लिए 6%), मेट्रो सेस और LBT सहित। रजिस्ट्रेशन: पिंपरी-चिंचवड का संबंधित सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (हवेली / मावल / मुलशी)। |
| मुंबई | स्टाम्प ड्यूटी BMC सीमा में 1% मेट्रो सेस सहित 6% (महिलाओं के लिए 5%)। रजिस्ट्रेशन: मुंबई सिटी और मुंबई सबअर्बन सब-रजिस्ट्रार ऑफिस। |
| ठाणे | स्टाम्प ड्यूटी TMC सीमा में ~7% (महिलाओं के लिए 6%), मेट्रो सेस और LBT सहित। रजिस्ट्रेशन: ठाणे ज़िला सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (ठाणे, कल्याण, भिवंडी, उल्हासनगर, अंबरनाथ)। |
| पालघर | स्टाम्प ड्यूटी नगर निगम, परिषद या ग्राम पंचायत सीमा के अनुसार ~4–7%। रजिस्ट्रेशन: पालघर ज़िला सब-रजिस्ट्रार ऑफिस (वसई, पालघर, डहाणू और अन्य)। |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एग्रीमेंट टू सेल और सेल डीड में क्या अंतर है?
एग्रीमेंट टू सेल भविष्य की शर्तों पर संपत्ति हस्तांतरित करने का वादा है; सेल डीड से वास्तव में स्वामित्व हस्तांतरित होता है। महाराष्ट्र में कब्ज़े वाले एग्रीमेंट पर पूरी स्टाम्प ड्यूटी लगती है, इसलिए बाद की डीड पर अक्सर नाममात्र ड्यूटी लगती है। विस्तृत तुलना (English)।
क्या महाराष्ट्र में एग्रीमेंट टू सेल का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है?
जिस एग्रीमेंट पर हस्तांतरण की स्टाम्प ड्यूटी भरी गई हो उसका रजिस्ट्रेशन ज़रूरी है, और बिल्डर एग्रीमेंट के लिए कीमत का 10% से अधिक भुगतान से पहले RERA के अनुसार रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। अनरजिस्टर्ड एग्रीमेंट अदालत में सौदे के सबूत के रूप में इस्तेमाल नहीं हो सकता।
एग्रीमेंट टू सेल पर कितनी स्टाम्प ड्यूटी लगती है?
मुंबई नगर निगम क्षेत्र में 6% और पुणे, पिंपरी-चिंचवड व ठाणे में लगभग 7% (महिलाओं के लिए 1% कम), एग्रीमेंट मूल्य और रेडी रेकनर मूल्य में से अधिक पर। रजिस्ट्रेशन शुल्क 1%, अधिकतम ₹30,000।
क्या एग्रीमेंट टू सेल रद्द हो सकता है?
हाँ, दोनों पक्षों के हस्ताक्षर वाली रजिस्टर्ड कैंसलेशन डीड से या एग्रीमेंट की डिफ़ॉल्ट शर्त के अनुसार। समय-सीमा में आवेदन करने पर स्टाम्प ड्यूटी का कुछ हिस्सा वापस मिल सकता है।
क्या ख़रीदार और विक्रेता दोनों को सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जाना पड़ता है?
हाँ, दोनों पक्ष (या उनके पावर ऑफ अटॉर्नी धारक) और दो गवाह हस्ताक्षर, फ़ोटो और अंगूठे के निशान के लिए मौजूद होने चाहिए। हम सारी तैयारी पहले करते हैं, इसलिए विज़िट एक घंटे के भीतर हो जाती है।
क्या NRI विदेश से एग्रीमेंट टू सेल पर हस्ताक्षर कर सकता है?
हाँ। NRI भारतीय दूतावास/वाणिज्य दूतावास में (या अपोस्टिल के साथ) भारत में किसी व्यक्ति के पक्ष में पावर ऑफ अटॉर्नी करता है, जो सब-रजिस्ट्रार के पास हस्ताक्षर करता है। POA भारत आने के तीन महीने के भीतर महाराष्ट्र में एडजुडिकेट करवाना होता है।






